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Wednesday, 24 September 2014

गब्रिएला मिस्तराल पर पाब्लो नेरुदा के संस्मरण Pablo Neruda on Gabriela Mistral

ब्रिएला मिस्तरापर पाब्लो नेरुदा के संस्मरण

[ अपने देश की समकालीन कवियित्री पर नेरुदा ने अपने 'संस्मरण' में जो लिखा । नेरुदा की पुण्यतिथि के अवसर पर प्रस्तुत है उनके संस्मरण का यह अंश ।] 



मैं पहले ही बता चुका हूं कि गब्रिएला मिस्तराल से मेरी मुलाकात मेरे गृहनगर टैम्को में हुई बाद में उसने वह नगर हमेशा के लिए छोड़ दिया ब्रिएला अपने कठोर और संघर्षपूर्ण जीवन के बीच में थी लेकिन तपस्विनी जैसी पवित्र लगती थी

यही समय होगा जब उसने मां और बच्चे पर अपनी कविताएं लिखीं ये कविताएं धाराप्रवाह गद्य में, मंजी हुईं और गरिमापूर्ण थीं उसका गद्य उसकी कविता की जान था उसने गर्भावस्था का वर्णन किया, जन्म और बच्चे के बड़े होने का वर्णन किया इसको लेकर टैम्को में गुपचुप अफवाहें चलीं, कुछ यूं ही और कुछ बहुत ही गंदी एक अविवाहित स्त्री होने के कारण उसकी भावनाओं को ठेस पहुंची मुझे मालुम है उनमें से कुछ अफवाहें बिना किसी मकसद के उन रेलवाइयों ने भी उड़ाईं जिनके तौर-तरीके भदेश थे और जो किसी भी बात को करने में कोई रू-रियायत नहीं बरतते थे

गब्रिएला को इससे बड़ी ठेस लगी और यह ठेस सूल बनकर जीवन भर सालती रही

सालों बाद, अपनी उस किताब के प्रथम संस्करण में उसने इसके बारे में एक लंबी टिप्पणी जोड़ी जिसमें इस घटना का बेबात ही जिक्र था



अपनी चरम सफलता के समय जब उसे नोबल पुरस्कार मिला तो उसे लेने के लिए वह टैम्को शहर से गुजरी स्कूल के बच्चे उसके दर्शन के लिए रोज स्टेशन पर आकर खड़े रहते थे स्कूल की लड़कियां बारिस में ठिठुरती फूलों के गुच्छे लिए खड़ी रहती थीं ये फूल हमारे देश के दक्षिण के प्यारे फूल थे लेकिन उनका इंतजार बेकार गया गब्रिएला मिस्तराल ने रात की गाड़ी ली जिससे कि टैम्को के इन फूलों से बचा जा सके

क्या इससे गब्रिएला का बुरा पक्ष सामने आता है ! इससे यही पता चलता है कि उसके घाव अभी हरे थे, वे उसकी आत्मा में गहरे तक चले गए थे और ठीक होने का नाम नहीं ले रहे थे इससे यही पता चलता है कि उसकी आत्मा में प्यार और क्रोध का द्वंद्व चल रहा था जो किसी भी मनुष्य की आत्मा में चलता है

मुझे वह हमेशा एक मित्रवत मुस्कान के साथ आत्मीयता से मिली वह मुस्कान उसके चेहरे पर लगता जैसे गहरे रंग की ब्रैड पर आटा बुरक दिया हो

वे कौन से तत्व थे जिनसे मिलकर उसका काव्य बना था ! उसकी कविता के गुप्त विधायक तत्व क्या थे  जो हमेशा एक दर्द से भरी होती थी !

मैं इसकी पड़ताल में नहीं जाना चाहता और चाहूं भी तो किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकता अगर पहुंच भी जाऊं तो उसे बताना नहीं चाहता

पुराने जंगली सरसों के फूल सितंबर के महीने में खिले हुए हैं गांवों में चारों तरफ पीला रंग बिखरा है यहां समुद्र तट पर दक्षिणी हवाओं के थपेड़े पिछले चार दिन से जारी हैं रातें अपनी गुंजायमान हलचलों से भरी हैं समुद्र हरे क्रिस्टल और विस्तारित श्वेत आभा से परिपूर्ण है

जंगली सरसों के फूलों, इन चट्टानों और इन तेज हवाओं  की पुत्री गब्रिएला तुम यहां आओ कंटीले वृक्षों और चिले की बर्फ को समर्पित तुम्हारे गीतों को कोई भूलेगा नहीं तुम चिले की हो तुम चिले के लोगों के मन में हो यहां के बच्चों के नंगे पैरों पर लिखे तुम्हारे गीत कोई भुला नहीं सकता तुहारेश्रापित शब्दोंको कोई भूला नहीं है तुम शांति की मित्र हो इन और ऐसे और कितने ही कारणों से हम तुम्हें प्यार करते हैं

तुम यहां आओ गब्रिएला, चिले के इन सरसों के फूलों और कंटीले पेड़ों के पास तुम्हारी महानता और हमारी दोस्ती के नाम मैं इन फूलों और कांटों के हारों से तुम्हारा स्वागत करता हूं चट्टानों और वसंत से बने सितंबर के द्वार तुम्हारे लिए खुले हैं मेरे दिल को इससे अच्छा सुकून क्या मिलेगा कि तुम्हारी खुली मुस्कान इस पवित्र भूमि पर फैल जाय और लोग तुम्हारे गीत गुनगुनाएं

मेरा सौभाग्य है कि मुझे सत्य और सार को शब्दों में तुम्हारे साथ गाने का अवसर मिला जो दुनिया में सराहे जाएंगे तुम्हारा उदार हृदय हमारे देश के इन पर्वतों और सागरों के बीच रहे, जिए, लड़े, गाए और खिले मैं तुम्हारे मस्त को चूमता हूं और तुम्हारी कविता को प्रणाम करता  हूं




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