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Saturday, 8 November 2014

मेरा जीवन, मेरा समय My Life, My Time - Pablo Neruda



मेरा जीवन, मेरा समय My Life, My Time - Pablo Nerud
 



[Hindi translation of the wonderful book of noble prize fame Chilean writer Pablo Neruda as "My Life, My Time."
The original Spanish title of the book was "Confieso que he vivido: Memorias" translated into English by Hardie St. Martin as "Memoirs".
Front pages and one subheading of the first chapter of the book are given here – Dr. Karan Singh Chauhan (Hindi Translator).]




मेरा जीवन, मेरा समय
पाब्लो नेरुदा
मूल शीर्षक “कन्फैसो क्यू हे विविदोः मैमोरियाज”



स्पानी से अंग्रेजी में अनुवाद अनुवाद
“मैमोयर्स”
हार्दिए सेंट मार्टिन



अंग्रेजी से अनुवाद
कर्ण सिंह चौहान










पाब्लो नेरुदा के संस्मरणों का संपादन
उनकी मृत्यु के कारण रोक देना पड़ा ।
मटील्डे नेरुदा और मिगाइल ऑटेरो सिल्वा ने
प्रकाशन के लिए मूल पुस्तक की यह पांडुलिपि तैयार की ।







विषय वस्तु

गांव का छोकरा
शहर में गुम
दुनिया की सड़कें
शानदार एकांत
स्पेन मेरे दिल में
मैं गिरे हुओं की खोज में गया
मैक्सिको – खिला हुआ और कांटेदार
अंधेरे में मेरा देश
निर्वासन की शुरूआत और अंत
समुद्री यात्रा और  स्वदेश वापसी
कविता एक कर्म है
आततायी, प्यारी मातृभूमि




पूर्वकथन


इन संस्मरणों या स्मृतियों में यहां-वहां बहुत से अंतराल हैं और कई बार तो उनमें कई भूल हैं, क्योंकि जीवन ऐसा ही है । सपनों के अंतराल काम के दिनों में शक्ति प्रदान करते हैं । आज जब मैं चीजों को याद करता हूं तो पाता हूं कि कुछेक चीजें धुंधली हो गई हैं, कुछ चकनाचूर हो गई हैं जैसे बुरी तरह टूटा हुआ शीशा ।

संस्मरण लेखक की स्मृति वैसी ही नहीं होती जैसी कि एक कवि की । वह चाहे कम ही जिया हो लेकिन उसने तस्वीर बड़ी खींची है और वह बहुत विस्तार से सब चीजों को बता सकता है । कवि हमें भूतों की एक ऐसी दीर्घा प्रदान करता है जो उसके समय की आग और अंधेरे से झ्कझोरी हुई हो ।

यह भी हो सकता है कि मैं अपने में जिया ही नहीं, या मैंने दूसरों की जिंदगी ही जी ।

इन पृष्ठों पर मैंने जो लिख छोड़ा है उनसे पीले पत्ते वैसे ही गिरेंगे जैसे पतझड़ में वृक्षों के कुंज से या फसल के समय अंगूरों की बेल सेकुछ मृत्यु को प्राप्त होते और कुछ अंगूर पवित्र शराब में नया जीवन पाते ।
मेरा जीवन उन सब जीवनों से मिलकर बना है,  एक कवि का जीवन ।




तीन विधवाओं का घर

एक बार मुझे फसल की गहाई पर बुलाया गया यह गहाई पुराने तरीके से खच्चरों के द्वारा होनी थी जगह पहाड़ों में काफी ऊपर थी और शहर से काफी दूर मुझे अपने आप वहां जाने का साहसिक प्रयास पसंद आया और मैंने उस पहाड़ी इलाके में सही रास्ते का खाका तैयार कर लिया मैंने सोचा कि अगर मैं खो भी गया तो किसी से रास्ता पूछ लूंगा मैंने शाही बाजो कस्बे को पीछे छोड़ दिया और नदी के रेत पर चलता रहा यहीं प्रशांत महासागर मौले पहाड़ की ऊंची चोटियों के नीचे की झाड़ियों में उद्दाम लहरों से गरजता है उसके बाद मैं बदी झील के किनारे-किनारे चलने लगा लहरें पहाड़ी के तल पर भयंकर वार कर रही थीं मुझे एक लहर और दूसरी के बीच के कुछ मिनटों के अंतराल का फायदा उठाना थायानी एक लहर के उठकर टूटने और फिर से ताकत जुटने के बीच का अंतराल सोचा कि मैं और मेरा घोड़ा नई लहर बनने तक पहाड़ी और पानी के बीच की जगह से गुजर जाएंगे

खतरा निकल गया, झील की नीली परत पश्चिम की तरफ खुली रेतीला तट अंतहीन रूप में टोल्टन झील की तरफ जा रहा था, जो वहां से बहुत दूरी पर थी चिले के ये ऊबड़खाबड़ और पथरीले समुद्रतट अंतहीन धागे में बदल जाते हैं और आप रात और दिन लगातार समुद्र के झाग के साथ-साथ चलते रह सकते हैं

ये समुद्रतट अनंत हैं और चिले की लंबाई के साथ-साथ बढ़ते जाते हैं जैसे पृथ्वी का घेरा जहां से दक्षिणी समुद्रों की गर्जना सुनाई पड़ती है एक ऐसी पगडंडी जो चिले के समुद्रतटों के साथ दक्षिण ध्रुव तक जाती है जंगल की तरफ चमकती हरी डालियों वाले भूरे पेड़ों ने मुझे अभिवादन किया, कुछ फलों से लदे हुए जंगली बादाम लगता जैसे सिंदूरी रंग में रंगे हैं दक्षिणी चिले के फर्न पेड़ इतने ऊंचे हैं कि मैं और मेरा घोड़ा बिना डाल छुए उनके नीचे से निकल सकते हैं जब भी मेरा सिर उनकी डाल से टकराता तो हम ओस की बारिस से भीग जाते बदी झील मेरे दाहिनी तरफ फैली थीएक स्थिर नीली चादर दूर तक फैले जंगलों से घिरी

झील के खत्म होने के बाद मुझे कुछ लोग दिखाई दिए वे अजनबी मछुआरे थे समुद्र और झील जहां मिलते थे या कहें टकराते थे वहां दोनों पानियों के बीच लहरों द्वारा लाई गईं कुछ नमकीन पानी की मछलियां थीं उथले पानी की इन बड़ी चांदी रंग की मछलियों की बहुत मांग रहती एक, दो, तीन, चार, पांच मछुवारे सीधे तने मछलियों पर टकटकी लगाए थे कि अचानक पानी पर तेजी से कांटा फेंकते फिर वे अंडाकार चांदी रंग की मछली को हवा में उछालते, तड़पती और रोशनी में चमकती मछली जो मछुआरे की टोकरी में दम तोड़ देती देर हो रही थी मैं झील का किनारा छोड़ अंदर गया पहाड़ियों के नुकीले कांटों के बीच रास्ता खोजता हुआ अंधेरा होने वाला था अचानक एक जंगली पक्षी का विलाप एक फटी आवाज की कराह की तरह मेरे ऊपर से  गया ऊपर तारों भरे आकाश में एक गिद्ध या चील मेरी उपस्थिति को भांप काले डैने बंद कर मुझे निहारता सड़क के दूसरे किनारे लाल पूंछ वाली लोमड़ियां रोतीं या भूंकती उस गुप्त जंगल में कुछ छोटे हिंस्र जानवर भी थे जिन्हें मैं नहीं जानता

तब मुझे मालुम हुआ कि मैं रास्ता भूल गया हूं जिस अंधेरे और जंगल ने मेरा मन मोह लिया था अब डरावने लगने लगे और मैं भयभीत हो गया रात्रि में उस बियाबान सड़क पर अचानक एक यात्री मेरे सामने गया जब मैं उसके पास गया तो देखा कि वह गंदे कपडों और मरियल घोड़े पर उन उजड्ड किसानों में से एक था जो बियाबान में कभी भी प्रकट हो जाते हैं
 
मैंने उसे अपनी स्थिति बताई

उसने कहा कि उस रात मेरा फसल गहाई वाली जगह पहुंचना तो असंभव है वह उस रास्ते की एक-एक चीज जानता था वह उस स्थान को भी जानता था जहां गहाई का काम हो रहा था मैंने कहा कि मैं रात बाहर नहीं बिताना चाहता इसलिए क्या वह बताएगा कि सुबह तक के लिए कहां जगह मिल सकती है उसने कुछ ही शब्दों में मुझे समझाया कि मैं उस सड़क से फटने वाली पगडंडी पर दो मील चलूं तो रहने की जगह मिल जाएगी

दूर तुम्हें एक बड़ी दो-मंजिली इमारत की बत्तियां दिखाई देंगी’, उसने मुझसे कहा
क्या वह होटल है !’ मैंने पूछा
नहीं भाई लेकिन तुम वहां ठहर सकते हो वहां तीन फ्रांसीसी औरतें रहती हैं जो पिछले तीस साल से वहां रह रही हैं वे सबसे अच्छी तरह पेश आती हैं तुम्हें भी रहने की जगह दे देंगी

मैंने उस घुड़सवार को उसकी इस संक्षिप्त सी सलाह के लिए धन्यवाद दिया और वह अपने पथरीले रास्ते पर आगे बड़ गया मैं उसकी बताई संकरी पगडंडी पर एक भटकी आत्मा की तरह चलता रहा एक अक्षत चंद्रमा, धनुषाकार और श्वेत आकाश में अपनी यात्रा शुरू कर रहा था
 
रात के नौ बजे मुझे उस घर की रोशनियां दिखाई पड़ीं मैंने घोड़े को एड़ लगाई कि कहीं ईश्वर प्रदत्त उस स्वर्ग के द्वार बंद हो जाएं मैं लक्कड़ों और बुरादे से बचता मुख्य द्वार से अंदर गया और अभी भी बीहड़ में छिपे उस घर के दरवाजे पर पहुंच गया मैंने दरवाजा खटखटाया, पहले धीरे से और फिर जोर से   कुछ मिनट बीत गए और जब कोई भी नहीं आया तो यह विचार मरे दिमाग में कौंध गया कि शायद वहां कोई है ही नहीं लेकिन तभी काले कपड़ों में सफेद बालों वाली एक दुबली सी औरत दिखाई दी मुझे कठोर नजरों से देखते उसने थोड़ा सा दरवाजा खोला शायद यह पूछने कि इतनी रात गए मैं वहां क्या कर रहा हूं

आप कौन हैं ! क्या चाहिए !’ एक शांत, भुतही सी आवाज ने पूछा

मैं जंगल में रस्ता भूल गया मैं एक छात्र हूं मुझे हर्नादेज के यहां गहाई के लिए बुलाया गया था मैं बहुत थक गया हूं किसी ने मुझे बताया कि आप और आपकी बहनें बहुत दयालु हैं मुझे रात बिताने के लिए बस थोड़ी सी जगह चाहिए सुबह होते ही मैं चला जाऊंगा
अंदर आइए’, उसने कहा इसे अपना ही घर समझिए

वह मुझे एक अंधेरी बैठक में ले गई और दो-तीन तेल की लालटेन जलाईं मैंने देखा कि वे  लालटेनें बहुत ही कलात्मक थीं, तांबे पर सोने का पानी चढ़ा हुआ कमरे में सीलन की महक थी ऊंची खिड़कियों पर लंबे, लाल पर्दे थे कुर्सियों को बचाने के लिए उनपर सफेद कवर चढ़े थे किससे बचाने के लिए !

वह किसी अन्य शताब्दी का कमरा था किस का यह तय करना मुश्किल था सपने जैसा पहेली भरा सफेद बालों और काले कपड़ों वाली महिला चिंतित सी चलती मैं उसके पैर देख सकता था चलने की आवाज सुन सकता था उसके हाथ कभी इस चीज को छूते, कभी उसे, एक एलबम, एक पंखा, यहां, वहां, चुपचाप

मुझे लगा कि मैं एक झील के तल में चला गया हूं और वहीं चुपचाप पड़ा सपना देख रहा हूं अचानक पहले जैसी ही दो और महिलाएं अंदर आईं काफी देर हो गई थी और ठंड भी थी वे मेरे पास ही बैठ गईंएक थोड़ा प्यार से मुस्कुराती हुई और दूसरी पहली की तरह ही उदास सी

अचानक हमारी बातचीत रास्ते की बातचीत से भटककर अलग विषयों की ओर मुड़ गई बाहर रात के हजारों कीटाणु थे, मेढ़कों की आवाजें थीं और रात के पक्षियों के गीत थे वे मेरी पढ़ाई के बारे में सब कुछ जानना चाहती थीं मैंने अपनी बातचीत में कवि बादलेयर का जिक्र करते हुए कहा कि मैंने उसकी कविताओं का अनुवाद शुरू किया है
ऐसे लगा जैसे चिंगारी निकली हो तीनों महिलाएं यह सुनते ही खिल उठीं उनकी निराश आंखें और सख्त चेहरे एकदम बदल गए मानो तीन प्राचीन मुखौटे मुख से अचानक गिर पड़े

बादलेयर !’ वे जैसे चिल्लाईं दुनिया की शुरूआत के बाद शायद यह पहला मौका है जब किसी ने इस निर्जन प्रदेश में उसका नाम लिया है हमारे पास यहां उसकी कविताओं का संग्रह है पांच सौ किलोमीटर के घेरे में शायद हमीं हैं जो उसके आश्चर्यजनक पृष्ठों को पढ़ सकती हैं इन पहाड़ों में कोई भी फ्रांसीसी भाषा नहीं जानता

दो बहनों का जन्म अविग्नान में हुआ था सबसे छोटी भी फ्रांसीसी रक्त से थी लेकिन चिले में पैदा हुई थी उनके दादा-दादी, माता-पिता, दूसरे सब संबंधी बहुत समय पहले मर चुके थे तीनों बहनें बारिस, हवा, मिल के बुरादे और कुछ आदिम से किसानों और गांव के नौकरों से अभ्यस्त हो चुकीं थी उन्होंने वहीं बसने का फैसला किया और इन बीहड़ पहाड़ों के बीच केवल उन्हीं का एक घर था

एक आदिवासी नौकरानी आई और उसने सबसे बड़ी बहन के कान में कुछ कहा हम उठकर ठंडे बरामदों को पार करते हुए बाहर गए और वहां से खाने के कमरे में मैं तो आश्चर्यचकित रह गया कमरे के बीचोंबीच  सफेद कपड़े से ढकी एक गोल खाने की मेज थी जो दो चांदी के लैंपों और बहुत सी मोमबत्तियों से जगमगा रही थी चांदी और क्रिस्टल से वह भव्य मेज दमक रही थी

मैं संकोच के मारे गड़ गया मानो रानी विक्टोरिया ने मुझे अपने महल में खाने पर बुलाया हो मैं तो थकामांदा, धूल से लथपथ था और यहां यह मेज थी राजकुमारों के खाने की मैं अपने में नहीं था उन्हें तो शायद मैं एक पसीने की बदबू मारता गधों का सवार लगा हूंगा जो अपने गधे उनके दरवाजे के बाहर बांधकर आया हो

मैंने कभी इतनी अच्छी तरह नहीं खाया मेरी मेजबान खाना बनाने की कला में पारंगत थीं और उनके पास अपने प्यारे फ्रांस की पाककला थी जो उन्हें अपने पुरखों से विरासत में मिली थी हरेक चीज बहुत ही आश्चर्यजनक, स्वादिष्ट और खुशबूदार थी अपने तलघर से वे अंगूर से बनी वाइन लाईं जिन्हें विशेष फ्रांसीसी तरीके से बनाया और रखा गया था

हालांकि थकान से मेरी आंखें बंद हो रही थीं लेकिन मैं उनकी आश्चर्यजनक कहानियां सुनता रहा बहनों को अपनी पाककला पर गर्व था उनके लिए खाने की मेज उस विरासत, उस संस्कृति की यादगार थी  जो देश समुद्रों के पार था और जहां वे कभी वापस नहीं जाएंगी अपने ऊपर हंसते हुए उन्होंने मुझे एक कार्ड फाइल दिखाई

हम बस पागल बूढ़ी औरतें हैं’, उनमें से सबसे छोटी ने कहा
 
पिछले तीस सालों में उनके घर दूर-दूर से सत्ताइस यात्री आए, कुछ काम से, कुछ केवल जिज्ञासावश, और मेरे जैसे कुछ केवल संयोग से सबसे अद्भुत बात यह थी कि उनमें से हरेक के बारे में उनके पास एक व्यक्तिगत फाइल थी, जिसमें उनके आने की तिथि के साथ क्या-क्या खाना बनाया, सबका विवरण मौजूद था

हम उस मेन्यू को बचाकर रखते हैं जिससे कि यदि वह फिर कभी वापस आए तो उसे वह खाना फिर से दें

मैं सोने चला गया और बिस्तर पर ऐसे गिरा जैसे बाजार में प्याज की बोरियां गिरती हैं सुबह-सवेरे उठकर मैंने एक मोमबत्ती जलाई और कपड़े पहन कर तैयार हो गया जब एक घुड़साल वाले लड़के ने मेरे घॉड़े पर जीन कसी तो प्रकाश हो गया था मुझमें काले कपड़ों वाली दयालु महिलाओं को विदा की नमस्ते कहने का साहस नहीं था मेरे अंदर कोई कह रहा था कि यह एक अजीब, जादुई सपना था और उसे टूटने देने के लिए जरूरी था कि मैं उन्हें जगाऊं नहीं

यह पैंतालीस साल पहले की बात है जब मैं युवावस्था में प्रवेश कर रहा था बादलेयर की किताब वाली उन तीन निर्वासित महिलाओं का उन बीहड़ जंगलों में क्या हुआ ! उनकी पुरानी जमा अंगूरी वाइन की बोतलों का और बीस बत्तियों से दमकती उस शानदार खाने की मेज का क्या हुआ ! उस लकड़घर और पेड़ों के बीच बने सफेद घर का क्या हुआ !

सबसे सहज जवाब होगामृत्यु और गुमनामी शायद जंगल ही उन लोगों और उस घर को लील गया होगा जहां मैंने एक अविस्मरणीय रात बिताई थी फिर भी वे मेरी यादों में जीवित हैं जैसे कि सपनों की झील के बिस्तर पर मैं उन तीन उदास महिलाओं की स्मृति को नमन करता हूं जो उस बीहड़ अकेलेपन में बिना किसी विशेष प्रयोजन के जीवित रहीं, शायद पुरानी दुनिया की गरिमा को जीवित रखने के लिए उन्होंने उस सब की रक्षा की जिसे उनके पूर्वजों ने अपने हाथों से बनाया था एक अत्युत्तम संस्कृति के आखिरी निशान, दुनिया के सबसे अकेले और दुर्गम पहाड़ों  के बीहड़ों के बीच